Friday, September 21, 2018

चलते रहना


जिस समय मे हम सब रह रहे हैं, वो किसी जादूनगरी से कम नही है, आंख मूद कर खोलते ही चीजे हमारे हाँथ में होती हैं,जिसके लिए न कुर्शी से उठना पड़ता है, और न ही ज्यादा इन्तजार करना पड़ता,उसके लिए तो हमारी हाँथ की उंगलियां ही काफी है।

जी मै बात कर रहा हूँ,बदलते समय के बारे में ,आवश्यकता ही अभिष्कार कि जननी है, नए तकनीको का अभिष्कार ही परिवर्तन है,और परिवर्तन ही हमारा जीवन है। जिसमे हमारे रोजमार्या की चीजें सामिल होती हैं,आज भले हमारे पास बहुत कुछ हो,सभी प्रकार की शुख शुभिधायें हों,लेकिन एक अच्छे  स्वास्थ्य की कमी  हर आदमी के पास है,जबकि हम सभी चाहते हैं की हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहे,किसी प्रकार जी कोई बीमारी न हो।
अगर मै अपनी बात करूं तो मै एक आम आदमी हूँ, जहां मुझे कई तरह के समझौते करने पड़ते हैं, जिसमे से एक किस्सा काफी मशहूर है, और लोगो की रायें भी काफी दिलचस्प है, मै एक लिमिटेड कंपनी मे नोकरी करता हूँ, मेरे आफिस से मेरे घर तक कि दूरी 3 से 4 किलोमीटर के बीच की है,आफिस जाते जाते समय तो मैं ऑटो का सहारा ले लेता हूँ,जबकि आफिस से घर आते हुये,मैं पैदल चलना ही पसंद करता हूँ,एक तो शाम का मनमोहक समय होता है, और दूसरा की मुझे आफिस से छुटकारा पाकर,गाने सुनने का मौका मिलता है, जिसे मैं गबाना नही चाहता।
पूरे दिन में सबसे ज्यादा खुशी मुझे चल कर घर जाने में होती है, एक तो ऑटो के पैसे बच जातें हैं, दूसरा हाँथ  पैर की एक्सरसाइज भी हो जाती है,और हिंदी गाने सुन कर ,दिल दिमाक भी सही हो जाता है,पैदल चल कर जाने में एक साथ कितने फायदे होते हैं और मै उन लोगों के ताना मारने ,मजाक उड़ाने के बारे में सोच कर ,चलना बंद कर दूं,जो कहते हैं कि मै पैसे बचाने के लिये पैदल चलता हूँ,मै कमजूस हूँ,इतना पैसा बचा कर ,कौन से बैंक में रखूँगा,और पता नही क्या क्या कहते रहते हैं। जबाब में मैं कुछ कहता नहीं, बल्कि हँस कर ही टाल देता हूँ,कोई अंधा तो है नही जो दिखाई नही देता, मुझे अच्छी तरह से पता है कि मेरे लिए क्या फायदे का और क्या नुकशान का,शाम को चलना भले एक बहाना हो,पर मैं अपने दैनिक जीवन मे चलता फिरता रहता हूँ,चाहे शुबह उठ कर दूध लाने जाना हो,या रात में भोजन करने के बाद,रिस्तेदारो से फोन में टहलते टहलते बात करना हो,जिससे मैं अपने आप को फिट और एक्टिव रखता हूँ, और इस समय मुझे स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या नही है,मेरे सिक्स पैक तो नही है लेकिन मैं उन लोगो की तरह भी नही दिखता,जो अपने बढ़े मोटाबे से परेशान हैं।

एक इंसान का जीवन चलते फिरते रहने का है, हँसते खेलते रहने का है, अगर हम छोटी छोटी बातों को समझ लें, और बिना किसी की परवाह किये ,अपने स्वास्थ्य के लिये कोई कदम उठाते हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं है, हमारी सेहद हमारे हाँथ में है, थोड़ा अपने स्टैटस को साइड में रख कर चलना,दौड़ना सीखें,और अपने साथियों को भी अपने अनमोल जीवन के बारे में बताएं ,बेकार के दिखाबे में अपने साथ खिलबाड़ मत करें, क्योंकि खाली पड़े घर मे भी कितना धूल मिट्टी,कीड़े मकोड़े डेरा जमा लेते हैं, हम तो फिर भी इंसान हैं,हमारे सही खान पीन,और व्यायाम न होने से,शरीर मे कई तरह के रोग मर्ज पनपने लगते हैं, और नतीजा ये होता है की हम किसी बहुत बड़ी बीमारी की गिरोह में फस जातें हैं।

ये जीवन हमारा है, और इसे कैसे जीना है, ये हमपे ही निर्भर करता है,फिर कितने ही परिवर्तन होते रहें,दुनियां चाहे चाँद पे भी क्यूँ न बसने लगे,लेकिन प्राकृति अपनी जगह हमेसा कायम रहेगी,दो कदम चलते फिरते रहने के लिए,अमीर गरीब होना जरूरी नही है, उसके लिए विचारों की जरूरत है, जो सही और गलत विषय का चुनाव कर सके,स्वास्थ रहिये,खुश रहिये और जीवन के सारे आनंद लेते रहिये।

धन्यवाद
पंकज चतुर्वेदी

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